ईदगाह Question Answer Class 11 Hindi Antra Chapter 1
ईदगाह Question Answer Class 11 Hindi Antra Chapter 1
Class 11 Hindi NCERT Solutions के लिए Chapter 1 “ईदगाह” की सम्पूर्ण और सरल व्याख्या यहाँ उपलब्ध है। इस अध्याय में प्रेमचंद द्वारा रचित कहानी का सार, पात्रों का विश्लेषण, भावार्थ, प्रश्नोत्तर और महत्वपूर्ण घटनाएँ विस्तार से समझाई गई हैं। अगर आप ईदगाह कहानी के प्रश्नों के उत्तर, important lines, summary, और character sketches खोज रहे हैं तो यह resource आपके लिए सबसे बेहतर है।
यह resource Class 11 Hindi छात्रों के लिए specially designed है ताकि वे ईदगाह Chapter 1 को अच्छे से समझें और exam में पूरी तैयारी कर सकें। यहाँ दिए गए NCERT Solutions से आप अपनी Hindi reading, writing और comprehension skills भी मजबूत कर सकते हैं।
प्रश्न – अभ्यास
1. ‘ईदगाह’ कहानी के उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जिनसे ईंद के अवसर पर ग्रामीण परिवेश का उल्लास प्रकट होता है।
उत्तर :– रमजान के पूरे तीस रोज़ों के बाद ईद का त्यौहार आया है। ईद नज़दीक आते ही गाँव का हर कोना उत्साह और रौनक से भर गया है। गलियों में लोगों की हलचल और खुशियों की लहर दिखाई दे रही है।
कोई नया कुरता पहनने की तैयारी में है, तो कोई बटन लगाने के लिए पड़ोस से सुई-धागा माँग रहा है। कोई अपने जूतों में तेल डालकर चमका रहा है, तो कहीं कोई अपने बैलों को चारा-पानी दे रहा है। हर घर में त्योहार की खुशबू फैली हुई है।
सबसे ज़्यादा उत्साह बच्चों में है। उनके चेहरों पर खुशी की चमक देखते ही बनती है। वे बेसब्री से ईदगाह और वहाँ लगने वाले मेले का इंतज़ार कर रहे हैं। मिठाइयाँ और खिलौने खरीदने के लिए वे अपने छोटे-छोटे गुल्लक में जमा पैसे गिनते नहीं थक रहे। पूरे गाँव में ईद की तैयारियों और उल्लास का माहौल छाया हुआ है।
2. ‘उसके अंदर प्रकाश है, बाहर आशा। विपत्ति अपना सारा दलबल लेकर आए, हामिद् की आनंद-भरी चितवन उसका विध्वंस कर देगी।’ इस कथन के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि आशा का प्रकाश मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
उत्तर :– जब इंसान के भीतर उम्मीद, जोश और हिम्मत होती है, तो वह कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानता और लगातार आगे बढ़ता रहता है।
हामिद के माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, और उसकी बूढ़ी दादी को चिंता है कि इतने कम पैसों में ईद कैसे मनाई जाए। लेकिन मासूम हामिद बेफ़िक्र है — उसके दिल में उम्मीद है कि एक दिन उसके माता-पिता लौट आएंगे और उसे सुंदर चीजें लाकर देंगे।
उसके पास सिर्फ तीन पैसे हैं, फिर भी वह अपने दोस्तों के साथ मेले में खुशियों से भरा हुआ है। यही आशा की रोशनी इंसान को संघर्ष करते रहने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
3. ‘उन्हें क्या खबर कि चौधरी आज आँखें बदल लें, तो यह सारी ईद मुहारम हो जाए।’ इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :– ईद के मौके पर बच्चों के चेहरे पर उत्साह और प्रसन्नता साफ दिखाई दे रही है। उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं है कि त्यौहार के खर्च के लिए पैसे कैसे जुटेंगे। त्यौहार पर खर्च करने के लिए उनके अब्बा चौधरी के पास पैसे लेने भागे जा रहे हैं। अगर चौधरी किसी वजह से पैसे देने से इंकार कर दें, तो बच्चों की ईद की खुशियाँ एकदम शोक और दुख में बदल जाएँगी, जैसे मुहर्रम का दिन हो।
4. ‘मानो भातृत्व का एक सूत्र इन समस्त आत्माओं को एक लड़ी में पिरोए हुए है।’ इस कथन के संद्भ में स्पष्ट कीजिए कि ‘धर्म तोड़ता नहीं जोड़ता है’।
उत्तर :– कहानी ‘ईदगाह’ में ईद के अवसर पर सभी लोग एक साथ मिलकर ईदगाह की ओर जा रहे हैं। यहाँ किसी की धन-संपत्ति या सामाजिक पद को कोई महत्व नहीं देता; इस्लाम के दृष्टिकोण में हर व्यक्ति समान और बराबर है। रोज़ेदार अपनी पंक्तियों में एक के पीछे एक खड़े होकर नमाज़ अदा करते हैं और एक-दूसरे से गले मिलकर अभिवादन करते हैं। इस अवसर पर गरीबी और अमीरी, ऊँच-नीच जैसी कोई चीज़ मायने नहीं रखती। ईद के इस त्यौहार में सभी एकता और खुशी के साथ सहभागी होते हैं। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि धर्म लोगों को अलग नहीं करता, बल्कि जोड़ता है, और इंसानों के बीच समानता, प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूत करता है।
5. ईदगाह कहानी के शीर्षक का औचित्य सिद्ध कीजिए। क्या इस कहानी को कोई और शीर्षक दिया जा सकता है ?
उत्तर :– कहानी ‘ईदगाह’ में ईद के दिन ईदगाह में चल रही चहल-पहल और उत्साह का जीवंत चित्रण किया गया है। इस त्यौहार में बड़े-बुज़ुर्ग और बच्चे सभी मिलकर आनंद का अनुभव करते हैं। लोग एक-दूसरे के साथ घुलमिलकर मेले की सैर करते हैं, नई चीज़ें खरीदते हैं और आपसी मिलन का आनंद उठाते हैं। यही कारण है कि कहानी का शीर्षक ‘ईदगाह’ रखा गया है, जो इस पर्व की खुशी और सामूहिक उल्लास को दर्शाता है।
कहानी का मुख्य पात्र हामिद है। उसके पास सिर्फ तीन पैसे हैं, और वह उन्हें अपने लिए खिलौना खरीदने की बजाय अपनी दादी के लिए चिमटा खरीदता है। हामिद अपनी बुद्धिमानी और चतुराई से अपने दोस्तों को चिमटे के महत्व और गुण बताते हुए उन्हें प्रभावित करता है। इस तरह ध्यान में रखते हुए कहानी का वैकल्पिक शीर्षक ‘हामिद का बड़प्पन’ भी रखा जा सकता है।
6. निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए-
(क) कई बार यही क्रिया होती है ……… आत्माओं को एक लड़ी में पिरोए हुए है।
उत्तर :– प्रेमचंद द्वारा लिखी गई कहानी ‘ईदगाह’ जिसमें ईद के दिन ईदगाह में नमाज़ अदा करने वाले लोगों की पंक्तिबद्धता और सामूहिक अनुशासन को चित्रण किया गया है।
ईदगाह के मैदान में लोग एक साथ कतारों में खड़े होकर नमाज़ पढ़ते हैं, और उनके चेहरे पर खुशी और मन में श्रद्धा तथा भक्ति की झलक दिखाई देती है। जब वे नमाज़ के दौरान झुकते और उठते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो लाखों दीपक एक साथ जल-बुझ रहे हों। इस दृश्य को देखकर ऐसा लगता है कि सभी लोग मानवीय भाईचारे के अदृश्य सूत्र में बँधे हुए हैं।
(ख) बुढ़िया का क्रोध ……… स्वाद से भरा हुआ।
उत्तर :– हामिद जब मेले से लौटकर तीन पैसे का चिमटा लाया, तो उसे देखकर उसकी बूढ़ी दादी अमीना पहले तो नाराज़ हो गईं। उन्होंने सोचा, बच्चे ने व्यर्थ चीज़ खरीद ली। पर जब हामिद ने बड़ी मासूमियत से कहा कि वह चिमटा इसलिए लाया है ताकि दादी रोटी सेंकते समय उनकी उँगलियाँ न जलें — तो उनकी आँखें नम हो उठीं। उस पल उनका सारा रोष ममता में बदल गया। दादी की भावनाएँ इतनी गहरी थीं कि वे उन्हें शब्दों में कह नहीं पा रही थीं। उनकी खामोशी में ही सारा स्नेह, अपनापन और आशीर्वाद छिपा था।
7. हामिद ने चिमटे की उपयोगिता को सिद्ध करते हुए क्या-क्या तर्क दिए ?
उत्तर :– जब हामिद ने मेले से चिमटा खरीदा, तो उसके दोस्तों ने उसका खूब मज़ाक उड़ाया। सबको लगा कि उसने बेकार चीज़ पर पैसे गंवा दिए हैं। लेकिन हामिद ने अपनी बुद्धिमानी से बताया कि यह चिमटा न टूटता है, न बिगड़ता है — कंधे पर रखो तो बंदूक जैसा लगता है और हाथ में लो तो फकीरों का साथी बन जाता है।
हामिद के लिए यह चिमटा सिर्फ़ एक साधारण चीज़ नहीं था, बल्कि समझदारी और साहस का प्रतीक था। उसके लिए यह ऐसा साथी था जो हर परिस्थिति में उसका साथ निभा सकता था।
8. गाँव से शहर जानेवाले रास्ते के मध्य पड़नेवाले स्थलों का ऐसा वर्णन प्रेमचंद ने किया है मानों आँखों के सामने चित्र उपस्थित हो रहा हो। अपने घर और विद्यालय के मध्य पड़नेवाले स्थानों का अपने शब्दों में वर्णंन कीजिए।
उत्तर :– जब मैं घर से विद्यालय की ओर जाता हूँ, तो रास्ते के दृश्य मन को बहुत भाते हैं। मोहल्ले की गलियों में बच्चे खेलते और लोग अपने कामों में व्यस्त रहते हैं।
सड़क के किनारे लगी नीम और पीपल की छाँव ताज़गी का एहसास कराती है। रास्ते में छोटी चाय की दुकान पर लोग अख़बार पढ़ते हुए चाय पीते दिखाई देते हैं।
विद्यालय के पास पहुँचते ही बच्चों की भीड़, स्कूल यूनिफ़ॉर्म में उनकी चहल-पहल और घंटी की आवाज़ माहौल को जीवंत बना देती है। इस मार्ग में जीवन की छोटी-छोटी झलकियाँ हर दिन को नया और रोचक बनाती हैं।
9. ‘बच्चे हामिद ने बूट्डे हामिद का पार्ट खेला था। बुढ़िया अमीना बालिका बन गई ।’ इस कथन में ‘बूड़े हामिद’ और ‘ बालिका अमीना’ से लेखक का क्या आशय है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :– इस कथन में लेखक का आशय यह है कि मेले से लौटते समय हामिद के व्यवहार और विचारों में एक परिपक्व व्यक्ति जैसी समझ दिखाई देती है। वह उम्र में छोटा होते हुए भी सोच में बहुत बड़ा है — जैसे कोई अनुभवी बूढ़ा व्यक्ति। इसलिए लेखक ने उसे ‘बूढ़ा हामिद’ कहा है। दूसरी ओर, उसकी दादी अमीना, जो उम्र में वृद्ध हैं, पर जब हामिद के प्रेम और चिंता को देखकर भावुक हो उठती हैं, तो उनका हृदय एक छोटी बच्ची की तरह कोमल और संवेदनशील हो जाता है। इसलिए लेखक ने उन्हें ‘बालिका अमीना’ कहा है। इस प्रकार, यह कथन हामिद की परिपक्वता और अमीना की ममता भरी कोमलता का प्रतीक है।
10. ‘दामन फैलाकर हामिद को दुआएँ देती जाती थी और आँसू की बड़ी-बड़ी बूँदें गिराती जाती थी। हामिद इसका रहस्य क्या समझता।’ लेखक के अनुसार हामिद अमीना की दुआओं और आँसुओं के रहस्य को क्यों नहीं समझ पाया ? कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :– लेखक के अनुसार, हामिद अभी बहुत छोटा था, इसलिए वह अपनी दादी अमीना के आँसुओं और दुआओँ का असली मतलब नहीं समझ सका। उसे यह ज्ञात नहीं था कि उसके द्वारा तीन पैसों का चिमटा खरीदना, अमीना के लिए कितना भावुक कर देने वाला क्षण था। हामिद ने मासूमियत में जो काम किया, उसमें छिपे प्रेम और त्याग की गहराई को वह नहीं जान पाया। अमीना के आँसू दुःख के नहीं, बल्कि गर्व और ममता से भरे थे – परंतु हामिद की नन्ही उम्र और भोली बुद्धि इन भावनाओं का रहस्य नहीं समझ सकी।
11. हामिद के चरित्र की कोई तीन विशेषताएँ बताइए।
उत्तर :– हामिद के चरित्र की तीन प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं —
(i). धैर्यवान और संतोषी:
गरीबी के बावजूद हामिद कभी शिकायत नहीं करता। उसकी खुशी छोटी-छोटी बातों में छिपी है। वह अपनी परिस्थितियों से हार मानने के बजाय उनमें सुख खोजता है।
(ii). सद्भावना और ममता से भरा हुआ:
हामिद का हृदय बेहद दयालु और संवेदनशील है। वह अपनी दादी की तकलीफ़ समझता है और उनके लिए चिमटा खरीदकर अपनी सच्ची ममता प्रकट करता है।
(iii). बुद्धिमान और व्यवहारिक:
छोटी उम्र होने के बावजूद हामिद सोच में बहुत परिपक्व है। जब उसके दोस्त खिलौने खरीदते हैं, तब वह अपनी ज़रूरत और दादी की सुविधा को प्राथमिकता देता है।
12. हामिद के अतिरिक्त इस कहानी के किस पात्र ने आपको सर्वाधिक प्रभावित किया और क्यों ?
उत्तर :– हामिद के अलावा इस कहानी में मुझे अमीना का पात्र सबसे अधिक प्रभावित करता है। अमीना एक दयालु, स्नेहमयी और त्यागमूर्ति दादी हैं, जो अत्यंत गरीबी में भी अपने पोते के सुख-दुःख की चिंता करती रहती हैं। उनके पास धन नहीं है, पर उनके मन में अपार ममता और करुणा है। जब हामिद चिमटा लाकर उन्हें देता है, तो उनके आँसू उनके स्नेह और गर्व दोनों की प्रतीक बन जाते हैं। अमीना का चरित्र यह सिखाता है कि सच्चा प्रेम शब्दों में नहीं, भावनाओं में होता है। उनका त्याग, सादगी और निःस्वार्थ प्रेम हर पाठक के हृदय को गहराई से छू जाता है।
13. ‘बच्चों में लालच एवं एक-दूसरे से आगे निकल जाने की होड़ के साथ-साथ निश्छलता भी मौजूद होती है’ -कहानी से कोई दो प्रसंग चुनकर इस मत की पुष्टि कीजिए।
उत्तर :– कहानी में यह दिखाया गया है कि बच्चों में लालच और आगे निकलने की होड़ तो होती है, लेकिन इसके साथ-साथ उनकी निश्छलता और मासूमियत भी मौजूद रहती है।
प्रसंग 1: मेले में हामिद के दोस्त उसे चिमटा खरीदते देखकर हँसते हैं, लेकिन हामिद ने तर्क से उसकी उपयोगिता बताकर दोस्तों को चुप करा दिया।
प्रसंग 2: हामिद की दादी अमीना उसके लिए दुआएँ करती और आँसू बहाती हैं, जिसे हामिद पूरी तरह नहीं समझ पाता। यह उसकी सरलता और मासूमियत को दर्शाता है।
14. ‘प्रेमचंद की भाषा बहुत सजीव, मुहावरेदार और बोलचाल के निकट है।’ कहानी के आधार पर इस कथन की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :– कहानी से स्पष्ट होता है कि प्रेमचंद की भाषा बहुत सजीव और प्राकृतिक है। उन्होंने रोज़मर्रा की बोलचाल और मुहावरों का प्रयोग करके पात्रों की भावनाओं को जीवंत रूप में पेश किया है।
उदाहरण के लिए, हामिद और उसकी दादी अमीना के संवाद इतने सरल और सहज हैं कि पाठक उन्हें जैसे सामने ही देख पा रहे हों। चिमटा खरीदने के प्रसंग में हामिद की मासूम बातें और दादी की भावनाओं का चित्रण इतनी प्रभावशाली भाषा में किया गया है कि पाठक उनके सुख-दुःख को महसूस करता है।
इस प्रकार, प्रेमचंद की भाषा कहानी को जीवंत और पाठक के दिल के करीब बनाती
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