Business Mathematics and Statistics Class 12 Solutions

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Business Mathematics and Statistics Class 12 Commerce – Chapter-wise Solutions List

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📘विषय-सूची (Chapter List)

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Chapter No.Chapter Name
Business Mathematics
1समांतर श्रेणी (Arithmetic Progression)
2गुणोत्तर श्रेणी (Geometric Progression)
3हरात्मक श्रेणी (Harmonic Progression)
4समांतर, गुणोत्तर तथा हरात्मक श्रेणियों के प्रगुण (Properties of A.P., G.P. and H.P.)
5क्रमचय एवं संचय (Permutation and Combination)
6सारणिक (Determinants)
7आव्यूह या मैट्रिक्स (Matrices)
8समुच्चय सिद्धांत (Set Theory)
9अवकलन (Differentiation)
10समाकलन (Integration)
Statistics
1केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप – समांतर माध्य (Measures of Central Tendency: Arithmetic Mean)
2माध्यिका (Median)
3बहुलक (Mode)
4गुणोत्तर माध्य (Geometric Mean)
5हरात्मक माध्य (Harmonic Mean)
6काल श्रृंखला का विश्लेषण (Analysis of Time Series)
7प्रायिकता सिद्धांत (Theory of Probability)
8अंतरालगणन एवं बाह्यगणन (Interpolation and Extrapolation)
Additional
लघुगणक तथा प्रतिलघुगणक सारणियाँ (Logarithms and Antilogarithms Tables)
नवीनतम मॉडल पेपर (Latest Model Paper)
परीक्षा प्रश्न-पत्र (Board Examination Paper)

📘 Class 12 Commerce – Business Mathematics and Statistics Chapter-wise Overview

व्यावसायिक गणित (Business Mathematics)

अध्याय 1 – समांतर श्रेणी (Arithmetic Progression):
इस अध्याय में संख्याओं के नियमित अंतराल पर बढ़ने या घटने वाले क्रम का अध्ययन किया गया है। यह व्यापारिक गणनाओं जैसे किश्तों, लाभ-हानि और ब्याज की गणना में उपयोगी है।

अध्याय 2 – गुणोत्तर श्रेणी (Geometric Progression):
इस अध्याय में ऐसी श्रेणियाँ शामिल हैं जिनमें प्रत्येक पद पिछले पद का निश्चित गुणनफल होता है। यह चक्रवृद्धि ब्याज, वृद्धि दर और निवेश के आकलन में महत्वपूर्ण है।

अध्याय 3 – हरात्मक श्रेणी (Harmonic Progression):
यह अध्याय हरात्मक माध्य से संबंधित है, जो गणितीय और भौतिक परिस्थितियों में उपयोग होता है, जैसे गति और दर से जुड़े प्रश्नों में।

अध्याय 4 – समांतर, गुणोत्तर तथा हरात्मक श्रेणियों के गुण (Properties of A.P., G.P. and H.P.):
इस अध्याय में तीनों श्रेणियों के गुण, संबंध और सूत्रों का विश्लेषण किया गया है जिससे जटिल प्रश्नों को आसानी से हल किया जा सके।

अध्याय 5 – क्रमचय एवं संचय (Permutation and Combination):
इसमें वस्तुओं के विभिन्न संयोजन और व्यवस्था की गणना सीखी जाती है। यह संभाव्यता और सांख्यिकी के प्रश्नों में बहुत उपयोगी है।

अध्याय 6 – सारणिक (Determinants):
सारणिकों का उपयोग रेखीय समीकरणों को हल करने और मैट्रिक्स की गणनाओं में किया जाता है। यह अध्याय बीजगणितीय गणनाओं की नींव रखता है।

अध्याय 7 – आव्यूह या मैट्रिक्स (Matrices):
इस अध्याय में मैट्रिक्स की अवधारणा, प्रकार, गुणा-योग और व्यावहारिक अनुप्रयोगों का अध्ययन किया गया है।

अध्याय 8 – समुच्चय सिद्धांत (Set Theory):
यह अध्याय गणित की मूलभूत अवधारणा “समुच्चय” पर आधारित है। इसमें विभिन्न प्रकार के सेट, उनके संक्रियाएँ और वेन आरेख की मदद से हल करने की विधियाँ दी गई हैं।

अध्याय 9 – अवकलन (Differentiation):
अवकलन का प्रयोग परिवर्तन दर (Rate of Change) ज्ञात करने में किया जाता है। यह व्यापारिक विश्लेषण, लागत और लाभ के अध्ययन में अत्यंत उपयोगी है।

अध्याय 10 – समाकलन (Integration):
इस अध्याय में समाकलन की विधियाँ और इसके उपयोगों का अध्ययन किया गया है, जो क्षेत्रफल और कुल मूल्य निकालने जैसे कार्यों में काम आता है।


सांख्यिकी (Statistics)

अध्याय 1 – केन्द्रीय प्रवृत्ति के माप (Measures of Central Tendency – Arithmetic Mean):
यह अध्याय डेटा के औसत या माध्य निकालने की विधियों को समझाता है, जिससे व्यावसायिक आंकड़ों का विश्लेषण आसान होता है।

अध्याय 2 – माध्यिका (Median):
माध्यिका डेटा के मध्य मान को दर्शाती है, जो असामान्य मूल्यों के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करती है।

अध्याय 3 – बहुलक (Mode):
बहुलक वह मान है जो डेटा में सबसे अधिक बार आता है। यह व्यापारिक प्रवृत्तियों और उपभोक्ता पसंद को समझने में सहायक है।

अध्याय 4 – गुणोत्तर माध्य (Geometric Mean):
यह अध्याय औसत वृद्धि दर की गणना के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर जब डेटा प्रतिशत या अनुपात में हो।

अध्याय 5 – हरात्मक माध्य (Harmonic Mean):
यह अध्याय दर, समय और गति से संबंधित आंकड़ों के विश्लेषण में उपयोगी है।

अध्याय 6 – काल श्रृंखला का विश्लेषण (Analysis of Time Series):
यह अध्याय समय के साथ बदलते व्यावसायिक डेटा का अध्ययन करता है, जिससे भविष्य की प्रवृत्तियों का अनुमान लगाया जा सके।

अध्याय 7 – प्रायिकता सिद्धांत (Theory of Probability):
इसमें किसी घटना के घटित होने की संभावना का अध्ययन किया जाता है, जो बीमा, निवेश और निर्णय-निर्धारण में आवश्यक है।

अध्याय 8 – अंतरालगणन एवं बाह्यगणन (Interpolation and Extrapolation):
यह अध्याय अधूरे या भविष्य के आंकड़ों का अनुमान लगाने की विधि बताता है, जो व्यापारिक पूर्वानुमान में बहुत उपयोगी है।

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