हमारे आस-पास के पदार्थ Notes Class 9 Science Chapter 1 With Solutions in hindi
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9th Class Science Chapter 1- हमारे आस-पास के पदार्थ
NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 1 – Matter in Our Surroundings provide detailed answers to all NCERT textbook questions and in-text exercises. These solutions help students of CBSE, UP Board, MP Board, Bihar Board, and other state boards to understand every concept clearly. Each question is explained with proper reasoning and illustrations to make learning easier and more effective.
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| Class 9 | Science |
| Chapter 01: | हमारे आस पास के पदार्थ (Matter Around Us) |
| Content: | JCERT Exercises and Extra Questions |
| Medium: | Hindi Medium |
| Publisher: | Alam Solution.com |
पाठ – 01 [Notes]
हमारे आस- पास के पदार्थ
(Matter in Our Surroundings)
🔹पदार्थ:-
कोई भी वस्तु जो कुछ स्थान घेरे, जिसमें द्रव्यमान एवं आयतन हो, और जो अवरोध उत्पन्न करे, पदार्थ कहलाती है I
उदाहरण :- पानी, हवा, ईंटा, पत्थर, किताब, कोपी, लोहा, लकड़ी आदि l – ये सभी पदार्थ हैं, क्योंकि इनमें द्रव्यमान होता है और ये किसी न किसी स्थान को घेरते हैंI
✨ पदार्थ की भौतिक प्रकृति:-
1. पदार्थ कणों का बना होता है।
2. पदार्थ के कण अत्यंत सूक्ष्म होते हैं।
3. पदार्थ के कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
4. पदार्थ के कण निरंतर गतिशील रहते हैं।
🔸पदार्थ का वर्गीकरण:
पदार्थ के भौतिक गुणों पर आधारित वर्गीकरण:-
हमारे चारों ओर पदार्थ विभिन्न रूपों में पाए जाते हैं। पदार्थ के मुख्य तीन रूप होते हैं:-
i). ठोस ii). द्रव iii). गैस
नोट:-
- जल को धीरे-धीरे ठंडा करने पर 0°C तापमान पर वह बर्फ के रूप में बदल जाता है।
- जल को गरम करने पर 100° C ताप पर यह वाष्प अवस्था में परिवर्तित हो जाता है।
🔹अंतराण्विक आकर्षण बल:–
हम जानते हैं कि पदार्थ अत्यंत छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है। इन कणों के बीच एक प्रकार का आकर्षण बल कार्य करता है। यही बल अंतराण्विक आकर्षण बल कहलाता है।
1. ठोस अवस्था:-
ठोस वह पदार्थ है जिसका निश्चित आकार और आयतन होता है। इसमें परमाणु, अणु या आयन एक-दूसरे से मजबूती से बंधे होते हैं, जिस कारण ठोस कठोर होते हैं I जैसे- बर्फ, लकड़ी, लोहा, पत्थर, ईंट आदि I
➡️ ठोस पदार्थों के सामान्य गुण:-
① आकृति एवं आयतन –
ठोस पदार्थ की आकृति और उसका आयतन निश्चित होता है।
② घनत्व –
ठोस पदार्थ का घनत्व उच्च होता है।
🔹घनत्व:–
किसी द्रव्य के इकाई आयतन का द्रव्यमान उसका घनत्व कहलाता है।
घनत्व = द्रव्यमान / आयतन
③ द्रवणांक एवं क्वथनांक –
ठोस पदार्थों के द्रवणांक एवं क्वथनांक प्रायः उच्च होते हैं।
🔹द्रवणांक/गलनांक – वह तापमान जिस पर कोई ठोस पदार्थ पिघलकर द्रव अवस्था में आता है। बर्फ का गलनांक 273.16 K है।
🔹क्वथनांक – वह तापमान जिस पर कोई द्रव उबलकर गैस अवस्था में बदल जाता है।
④ कणों की अवस्था –
ठोस पदार्थ में उसके अवायवीय कण नियमित रूप से जालक कहलाते हैं।
⑤ संपीडयता –
ठोस पदार्थ असंपीडय होते हैं।
⑥ बहाव –
ठोस पदार्थों में बहाव की प्रवृत्ति नहीं होती है।
⑦ प्रसार या संकुचन –
ठोस पदार्थ को गर्म या ठंडा करने पर इनका प्रसार या संकुचन बहुत ही कम होता है।
⑧ उर्ध्वपातन –
वह प्रक्रिया, जिसमें कोई ठोस पदार्थ गर्म किये जाने पर बिना द्रव रूप में परिनत हुए सीधे वाष्प की अवस्था में बदल जाता है और उस वाष्प को ठंडा करने पर वह बिना द्रव रूप में परिनत हुए सीधे ठोस की मूल अवस्था में परिवर्तित को उर्ध्वपातन कहते है।
⑨ प्रसरण –
वह प्रक्रिया है, जिसमें किसी द्रव्य के कण किसी अन्य द्रव्य में प्रवेश करते हैं अर्थात् सामान्यतः कोई ठोस पदार्थ किसी दूसरे ठोस पदार्थ में प्रसारित नहीं होता है। क्योंकि ठोस पदार्थों के कणों के बीच कम स्थान होता है।
2. द्रव अवस्था:-
द्रव अवस्था वह है जिसमें किसी पदार्थ का आयतन तो निश्चित होता है लेकिन आकार निश्चित नहीं होता।इस अवस्था में अणु ठोस की तुलना में अधिक स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं I जैसे- दूध, जल, तेल, घी, जूस आदि I
➡️ द्रव पदार्थों के सामान्य गुण –
① आकृति एवं आयतन–
द्रव की आकृति निश्चित नहीं होती किंतु उसका आयतन निश्चित होता है।
② घनत्व –
द्रव का घनत्व उसके ठोस रूप के घनत्व से कम होता है।
③ संपीड्यता –
द्रव प्रायः असंपीड्य होते हैं, किंतु ठोस की तुलना में ये थोड़ा अधिक संपीड्य होते हैं।
④ द्रवणांक एवं क्वथनांक –
द्रवों के द्रवणांक एवं क्वथनांक ठोस पदार्थों से प्रायः कम होते हैI
⑤ बहाव –
द्रव पदार्थों में बहाव की प्रवृत्ति पाई जाती है।
⑥ प्रसरण –
द्रवों में परस्पर मिश्रित हो जाने की प्रवृत्ति पाई जाती हैI क्योंकि इसमें बहने का गुण होता हैI
⑦ द्रव का जमना –
किसी भी द्रव का ठोस के रूप में परिवर्तन द्रव का जमना कहलाता है।
⑧ वाष्पन –
जिस प्रक्रिया द्वारा जल वाष्प में परिवर्तित हो जाता है, उसे वाष्पन कहते हैं।
🔸वाष्पन को प्रभावित करने वाले कारण:-
द्रव का वाष्पन निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है –
1️⃣ द्रव की प्रकृति पर
2️⃣ द्रव के ताप पर
3️⃣ द्रव का पृष्ठीय क्षेत्रफल पर
4️⃣ वायु के वेग पर
5️⃣ आर्द्रता पर
- आर्द्रता –
वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा को आर्द्रता कहते हैं।
- आर्द्र वायु में द्रव का वाष्पन बहुत कम होता है, जबकि शुष्क वायु में वाष्पन तेजी से होता है। इसलिए भींगा हुआ कपड़ा शुष्क वायु में अर्थात् गर्मियों में तेजी से सूख जाता है, जबकि आर्द्र वायु में अर्थात् वर्षा के दिनों में सूखने के लिए यह अधिक समय लेता है।
Que.वाष्पन की क्रिया में ठंडक उत्पन्न होती है? व्याख्या कीजिए।
Ans – वाष्पन की क्रिया द्रव के सतह पर होती है। सतह पर वाले द्रव के कण द्रव के भीतरी भाग से ऊष्मा, ऊर्जा ग्रहण करके अत्यधिक उर्जा प्राप्त कर लेते हैं, जिससे ये गैस के रूप में वायु में चले जाते हैं। इससे द्रव का ताप कम हो जाता है और वह ठंडा हो जाता है।
Que.गर्मी के दिनों में हम कपास के बने कपड़े (सूती वस्त्र) क्यों पहनते हैं?
Ans – गर्मी के दिनों में हमारे शरीर से पसीना काफी मात्रा में निकलता है। पसीना हमारे शरीर से ऊष्मा प्राप्त कर वाष्पित होता है। इससे हमें ठंडक का एहसास होता है। चूँकि सूती कपड़ा जल का एक अच्छा शोषक है, अतः यह हमारे शरीर से निकले पसीने को आसानी से सोखकर वायु के संपर्क में ला देता है। इसलिए गर्मी के दिनों में हम सूती वस्त्र पहनना पसंद करते हैं।
3. गैसीय अवस्था:-
➡️ गैस पदार्थों के सामान्य गुण:-
① आकृति एवं आयतन –
गैस के आकृति एवं आयतन निश्चित नहीं होती है।
② घनत्व –
गैस का घनत्व ठोस एवं द्रव के तुलना में बहुत ही कम होता है।
③ संपीड्यता –
गैस प्रायः संपीड्य होते हैं। अर्थात् इसके दबाने से इसके आकार में परिवर्तन हो सकता हैl
④ द्रवणांक एवं क्वथनांक –
गैसों के द्रवनांक एवं क्वथनांक ठोस एवं द्रव के तुलना में बहुत ही कम होता है।
⑤ बहाव –
गैस पदार्थों में बहने की प्रवृति नहीं होती है I
⑥ प्रसरण –
गैसों में परस्पर मिश्रित हो जाने की प्रवृत्ति पाई जाती है।
⑦ प्रसार व संकुचन –
गैस पदार्थ को ठंडा या गर्म करने पर इसका प्रसार या संकुचन बहुत अधिक होता है।
⑧ गैसों का संघनन –
गैसीय अवस्था का द्रव रूप में परिवर्तन गैस का संघनन कहलाता है।
⑨ गैस का दाब –
बर्तन की दीवारों के प्रति इकाई क्षेत्रफल पर गैस के कणों द्वारा अवशोषित बल गैस का दाब कहलाता है।
⚡ °C (सेल्सियस) और K (केल्विन) में संबंध–
Eg:- t°C = (273+t) K
°C = (273+0) K = 273K
10°C = (273+10) K = 283 K
⚡K (केल्विन) और °C (सेल्सियस) में संबंध –
Eg:- 400 K = (400-273) °C =127°C
50K = (50-273) °C = 223°C
पाठ – 01 [Solutions]
हमारे आस- पास के पदार्थ
(Matter in Our Surroundings)
प्रश्न – 01
1.निम्नलिखित में से पदार्थ है:-
कुर्सी, वायु, स्नेह, गंध, घृणा, बादाम, विचार, शीत, शीतल पेय, अगरबत्ती की सुगंध
उत्तर:- कुर्सी, वायु, गंध, बादाम, शीत, पेय, सुगंध
2. निम्नलिखित प्रेक्षण के कारण बताएँ –
गर्मा-गरम खाने की गंध कई मीटर दूर से ही आपके पास पहुंच जाती है, लेकिन ठंडे खाने की महक लेने के लिए आपको उसके पास जाना पड़ता है, क्यों?
उत्तर:– क्योंकि पदार्थ के कण निरंतर गतिशील रहते हैं तथा तापमान बढ़ने पर कणों की गति तेज हो जाती हैI खाने से गंध विसरण द्वारा हम तक पहुँचती है l गर्म खाने का तापमान अधिक होने के कारण विसरण की दर ठंडे खाने की अपेक्षा अधिक होती है। अतः कई मीटर दूर से ही गंध पहुंच जाती है।
3. स्वीमिंग पूल में गोताखोर पानी काट जाता है, इससे पदार्थ के कणों का कौन-सा गुण प्रेक्षित होता है?
उत्तर:– स्वीमिंग पूल में गोताखोर पानी काट पाता है, जो यह दर्शाता है कि पदार्थ (पानी) के कणों के बीच लगने वाला बल कम होता है, अतः यह पानी के कण आसानी से अलग होते हैं।
4. पदार्थ के कणों की क्या विशेषताएं होती है?
उत्तर:– 1. पदार्थ कणों का बना होता है।
2. पदार्थ के कण अत्यंत सूक्ष्म होते हैं।
3. पदार्थ के कण एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
4. पदार्थ के कण निरंतर गतिशील रहते हैं।
प्रश्न – 02
1. किसी तत्व के द्रव्यमान प्रति इकाई आयतन को घनत्व कहते हैंI
(घनत्व =द्रव्यमान / आयतन)
बढ़ते हुए घनत्व के क्रम में निम्नलिखित को व्यवस्थित करें – वायु, चिमनी का धुआँ, शहद, जल, चॉक, रूई, और लोहा I
उत्तर:– चिमनी का धुआँ < वायु < जल < शहद < रुई < चॉक < लोहा
2 (a). पदार्थ की विभिन्न अवस्थाओं के गुणों के अंतर को सारणीबद्ध कीजिए।
उत्तर:–🔹 ठोस, द्रव और गैस का तुलनात्मक अध्ययन –
| गुण | ठोस (Solid) | द्रव (Liquid | गैस (Gas) |
|---|---|---|---|
| आकृति एवं आयतन | आकृति एवं आयतन निश्चित होते हैं। | आकृति निश्चित नहीं होती किंतु आयतन निश्चित होता है। | आकृति एवं आयतन निश्चित नहीं होते हैं। |
| घनत्व | उच्च घनत्व के ठोस होते हैं। | ठोस की तुलना में घनत्व कम होता है। | घनत्व बहुत ही कम होता है। |
| प्रसार या संकुचन | बहुत ही कम होता है। | प्रायः कम होता है। | ठोस एवं द्रव की तुलना में बहुत अधिक होता है। |
| द्रवणांक एवं क्वथनांक | प्रायः उच्च होते हैं। | ठोस की तुलना में कम होते हैं। | बहुत ही कम होते हैं। |
| संपीड्यता | असंपीड्य होते हैं। | असंपीड्य होते हैं किंतु ठोस की तुलना में अधिक होती है। | संपीड्य होते हैं, दबाने से आकार बदल जाता है। |
| बहाव की प्रवृत्ति | नहीं पाई जाती है। | बहाव की प्रवृत्ति पाई जाती है। | बहुत अधिक बहाव की प्रवृत्ति होती है। |
| प्रसरण | बहुत ही कम होता है। | ठोस से अधिक होता है। | अत्यधिक होता है। |
2 (b). निम्नलिखित पर टिप्पणी दीजिए –
– दृढ़ता, संपीड्यता, तरलता, बर्तन में गैस का भरना, आकार, गतिज ऊर्जा एवं घनत्व I
उत्तर:– 1️⃣ दृढ़ता –
ठोस पदार्थों के कण आपस में अत्यधिक बल से जुड़े होते हैं, जिससे उन्हें तोड़ना या दबाना कठिन होता है।
इसी गुण को दृढ़ता कहते हैं।
2️⃣ संपीड्यता –
द्रव और गैसीय पदार्थों के कणों के बीच रिक्त स्थान होता है जिसमें हवा भरी होती है, इसलिए उन्हें दबाया जा सकता है।इस गुण को संपीड्यता कहते हैं।
- ठोस में संपीड्यता नहीं होती।
- द्रव में संपीड्यता कम होती है।
- गैस में संपीड्यता अत्यधिक होती है।
3️⃣ तरलता –
पदार्थों के बहने के गुण को तरलता कहते हैं।
- ठोस में बहाव की प्रवृत्ति नहीं होती।
- द्रव में बहाव की प्रवृत्ति पाई जाती है।
- गैसों में भी बहाव की प्रवृत्ति देखी जाती है।
4️⃣ बर्तन में गैस का भरना –
गैसों के कणों के बीच काफी रिक्त स्थान होता है, जिससे उन्हें आसानी से दबाया जा सकता है।
इसी कारण, एक छोटे बर्तन में भी काफी मात्रा में गैस भरी जा सकती है।
5️⃣ गतिज ऊर्जा –
वस्तुओं में गति के कारण जो ऊर्जा या कार्य करने की क्षमता होती है, उसे गतिज ऊर्जा कहते हैं।
6️⃣ आकार –
वस्तु जितना स्थान घेरती है, उसे उसका आकार कहते हैं।
- ठोस पदार्थों की आकृति निश्चित होती है।
- द्रव एवं गैसों की आकृति निश्चित नहीं होती — ये अपने पात्र का आकार ग्रहण कर लेते हैं।
7️⃣ घनत्व –
किसी वस्तु के इकाई आयतन में उपस्थित द्रव्यमान को घनत्व कहते हैं। घनत्व = द्रव्यमान/आयतन
- ठोस पदार्थों का घनत्व उच्च होता है।
- द्रव का घनत्व ठोस की तुलना में कम होता है।
- गैसों का घनत्व ठोस एवं द्रव की तुलना में बहुत कम होता है।
3. कारण बताएं –
(a) गैस पूरी तरह उस बर्तन को भर देती है, जिसमें इसे रखते हैं।
उत्तर:– क्योंकि गैस का आयतन अनिश्चित होता है।
(b) गैस बर्तन की दीवारों पर दबाव डालती है।
उत्तर:– गैसों के कण निरंतर गतिशील रहते हैं। ये बर्तन की दीवारों से निरंतर टकराते रहते हैं और बर्तन की दीवारों पर दबाव डालती हैं।
(c) लकड़ी की मेज ठोस कहलाती हैI
उत्तर:– लकड़ी की मेज़ दृढ़ होती हैं और उसका निश्चित आकार एवं आयतन होता हैं।
(d) हवा में हम आसानी से अपना हाथ चला सकते हैं लेकिन एक ठोस लकड़ी के टुकड़े में हाथ चलाने के लिए हमें कराटे में दक्ष होना पड़ेगा I
उत्तर:– हवा के कणों के बीच आकर्षण बल बहुत कम होता है, जबकि लकड़ी के कण आपस में सघन रूप से जुड़े होते हैं। इसलिए लकड़ी ठोस होती है और उसे तोड़ने या हाथ पार करने के लिए अधिक बल की आवश्यकता होती है।
4. सामान्यतया ठोस पदार्थों की अपेक्षा द्रवों का घनत्व कम होता हैl लेकिन आपने बर्फ के टुकड़े को जल में तैरते हुए देखा होगा I पता लगाइए, ऐसा क्यों होता है?
उत्तर:– आमतौर पर ठोस का घनत्व द्रव की अपेक्षा अधिक होता है। द्रव का घनत्व 4°C पर अधिकतम होता है, परंतु इस ताप से नीचे इसका घनत्व कम हो जाता है। अतः 0°C पर जल बर्फ में बदल जाता है तथा बर्फ का घनत्व कम होने के कारण यह जल पर तैरती है।
प्रश्न – 03
1. निम्नलिखित तापमान को सेल्सियस मे बदलें–
(a) 300 K (b) 573 K
उत्तर:– (a) 300 K= (300-273)°C = 27°C
(b) 573 K = (573-273)°C = 300°C
2. निम्नलिखित तापमान पर जल की भौतिक अवस्था क्या होगी–
(a) 250°C (b) 100°C
उत्तर:– (a) 250°C पर जल गैसीय अवस्था में होता हैI
(b) 100°C पर जल द्रव अवस्था में होती हैI
3. किसी भी पदार्थ की अवस्था परिवर्तन के दौरान तापमान स्थिर क्यों होता है?
उत्तर:– क्योंकि पदार्थ की दी गई ऊष्मा अवस्था परिवर्तन के रूप में प्रयुक्त हो जाती है और गुप्त ऊष्मा के रूप में पदार्थ द्वारा अवशोषित कर ली जाती है।
4. वायुमंडलीय गैसों को द्रव में बदलने के लिए कोई विधि सुझाइए?
उत्तर:– वायुमंडलीय गैसों को द्रव में बदलने के लिए दो विधियों का उपयोग किया जाता है: गैस के अणुओं पर दबाव बढ़ाकर, ताकि वे करीब आ सकें। गैसों का तापमान कम करना ताकि उनकी गतिज ऊर्जा कम हो। दाब को बढ़ाकर तथा तापमान को घटाकर वायुमंडलीय गैसों को द्रव में परिवर्तित किया जाता है।
प्रश्न – 04
1. गर्म, शुष्क दिन में कूलर अधिक ठंडा क्यों करता है?
उत्तर:– क्योंकि शुष्क दिनों में तापमान अधिक होता है तथा आर्द्रता की कमी होती है। इसमें वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है जिससे ठंडक होती है।
2. गर्मियों में घड़े का जल क्यों ठंडा होता है?
उत्तर:– घड़े की मिट्टी के कण जल से ऊर्जा प्राप्त करके वाष्पीकृत कर देते हैं। परिणामस्वरूप जल ठंडा हो जाता है।
3.एसीटोन / पेट्रोल या इत्र डालने पर हमारी हथेली ठंडी क्यों हो जाती है?
उत्तर:– क्योंकि एसीटोन/पेट्रोल का क्वथनांक कम होने के कारण ये हमारी हथेली से ही ऊष्मा प्राप्त करके वाष्प में बदल जाते हैं जिससे ठंडक होती है।
4. कप की अपेक्षा प्लेट से हम गर्म दूध या चाय जल्दी क्यों पी लेते हैं?
उत्तर:– क्योंकि कप की अपेक्षा प्लेट का सतह क्षेत्र अधिक होता है। जिसके कारण वाष्पीकरण अधिक होता है और चाय जल्दी ठंडी हो जाती है।
5. गर्मियों में हमें किस तरह के कपड़े पहनने चाहिए?
उत्तर:– गर्मियों में हमें सूती कपड़े पहनने चाहिए। क्योंकि गर्मी में पसीना अधिक आने से सूती कपड़े द्वारा अवशोषित पसीना शीघ्र वाष्पित होकर हमें शीतलता प्रदान करता है।
अभ्यास (Exercises)
1. निम्नलिखित तापमानों को सेल्सियस इकाई में परिवर्तित करें–
(a) 300 K (b) 573 K
उत्तर:– (a) 300 K = (300 – 273) °C = 27 °C
(b) 573 K = (573 – 273) °C = 300 °C
2. निम्नलिखित तापमानों को केल्विन इकाई में बदलें–
उत्तर:– (a) 25°C (b) 373°C
(a) 25°C = (25 + 273)K = 298 K
(b) 373°C = (373 + 273)K = 646 K
3. निम्नलिखित अवलोकनों हेतू कारण लिखें:-
(a) नैफ्थलीन को रख देने पर यह समय के साथ कुछ भी ठोस पदार्थ छोड़े बिना अदृश्य हो जाती है।
उत्तर:– क्योंकि नैफ्थलीन एक ऊर्ध्वपातित पदार्थ है, जिसका अर्थ है कि यह ठोस अवस्था से सीधे गैसीय अवस्था में परिवर्तित हो जाती है, बिना द्रव अवस्था में बदले। इस प्रक्रिया को ऊर्ध्वपातन कहते हैं। इसलिए, इसे खुला रखने पर यह धीरे-धीरे वाष्पीकृत होकर अदृश्य हो जाती है I
2. हमें इत्र की गंध बहुत दूर बैठे हुए पहुँच जाती है l
उत्तर:– इत्र के कणों की गतिज ऊर्जा अधिक होती है। जब हम इत्र का छिड़काव करते हैं, तो इसके कण हवा में मिलकर चारों ओर फैल जाते हैं (विसरण प्रक्रिया)। वायु की धाराएं भी इन कणों को कमरे के चारों ओर फैलाने में मदद करती हैं। इत्र के कणों के इस प्रकार फैलने के कारण, कुछ दूरी पर बैठे होने के बाद भी हमें इसकी गंध प्राप्त हो जाती है।
4. निम्नलिखित पदार्थों को उनके कणों के बीच बढ़ते हुए आकर्षण के अनुसार व्यवस्थित करें –
(a) जल
(b) चीनी
(c) ऑक्सीजन
उत्तर:– पदार्थों में अंतराआण्विक आकर्षण बल का क्रम उनकी अवस्था पर निर्भर करता है। जैसे- ठोस में यह सर्वाधिक, द्रव में उससे कम और गैस में सबसे कम होता है। परंतु पानी तथा चीनी में सर्वाधिक होगाl
इसलिए, बढ़ते हुए आकर्षण बल का सही क्रम है:-
ऑक्सीजन < जल < चीनी
5. निम्नलिखित तापमानों पर जल की भौतिक अवस्था क्या है?
(a) 25°C
(b) 0°C
(c) 100°C
उत्तर:– (a) 25°C पर द्रव
(b) 0°C पर ठोस
(c) 100°C पर वाष्प/गैस
6. पुष्टि हेतु कारण दें –
(a) जल कमरे के ताप पर द्रव हैl
उत्तर:– साधारण तापमान पर पानी द्रव होता है क्योंकि इसका कोई निश्चित आकार नहीं होता, यह उस बर्तन का आकार ग्रहण कर लेता है जिसमें इसे रखा जाता हैl दूसरा यह सरलता से प्रवाहित हो सकता हैl यथार्थ यह दृढ़ न होकर तरल हैl
(c) जल के अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंधन होते हैं, जो उन्हें एक-दूसरे से बांधे रखते हैं, लेकिन इतनी दृढ़ता से नहीं कि वे ठोस बन जाएं। यह उन्हें बहने और बर्तन का आकार लेने की अनुमति देता है, जो द्रव का एक गुण है।
(b) लोहे की अलमारी एक ठोस है।
उत्तर:– क्योंकि इसका आकार निश्चित होता है। यह प्रवाहित नहीं होती है।यानि यह दृढ है।
7. 273 K पर बर्फ को ठंडा करने पर तथा जल को इसी तापमान पर ठंडा करने पर शीतलता का प्रभाव अधिक क्यों होता है?
उत्तर:– 273 K पर पानी के कणों की अपेक्षा बर्फ के कणों की ऊर्जा कम होती है। जिसके परिणामस्वरूप बर्फ वातावरण से अधिक ऊष्मा अवशोषित करता है। यही कारण है कि समान ताप पर होते हुए भी बर्फ पानी की अपेक्षा अधिक ठंडक पहुंचाता है।
8. उबलते हुए जल अथवा भाप में से जलने की तीव्रता किसमें अधिक महसूस होती है?
उत्तर:– 373 K पर वाष्प के कणों की ऊर्जा समान ताप पर पानी के कणों की ऊर्जा से अधिक होती है। ऐसा वाष्प के कणों द्वारा वाष्पन की गुप्त ऊष्मा के रूप में अतिरिक्त ऊर्जा अवशोषित किए जाने के कारण होता है। अतः जब वाष्प त्वचा के संपर्क में आता है तो समान ताप पर उबलते पानी की अपेक्षा अधिक ऊर्जा मुक्त करता है। जिसके फलस्वरूप 373 K पर वाष्प द्वारा समान उबलते पानी की अपेक्षा अधिक जलन उत्पन्न होती है।
9. निम्नलिखित चित्र के लिए ABCDEF परिवर्तन को नामांकित अवस्था करें –

उत्तर:– A: गलन (Melting)
B: संघनन (Condensation)
C: निक्षेपण (Deposition)
D: हिमीकरण (Freezing)
E: ऊर्ध्वपातन (Sublimation)
F: वाष्पीकरण (Vaporization)
